राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स 19 अप्रैल-(Current Affairs April 19) Daily Update. Most important All General competition.


 Q.हाल ही में, कौन कैरेबियन प्रीमियर लीग (CPL) खिलाड़ी ड्राफ्ट में शामिल होने वाले पहले भारतीय बने है?

(a) हार्दिक पंडया(b) इरफान पठान✔(c) विराट कोहली(d) आर पी सिंह

Details👇

हाल ही में, ऑलराउंडर इरफान पठान 16 मई 2019 को कैरेबियन प्रीमियर लीग (सीपीएल) के खिलाड़ियों के ड्राफ्ट में शामिल होने वाले पहले भारतीय क्रिकेटर बन गये। सीपीएल 2019 के खिलाड़ियों के ड्रॉफ्ट घोषणा की गई जिसमें इरफान में एकमात्र भारतीय हैं। बता दे की इरफान पठान अगर सीपीएल की नीलामी में खरीद लिए जाते हैं तो वह किसी बड़ी विदेशी टी-20 लीग में खेलने वाले पहले भारतीय क्रिकेटर बन जाएंगे। नीलामी के लिए तैयार 20 देशों के कुल 536 खिलाड़ियों के ड्राफ्ट में इरफान पठान को शामिल किया गया है।

❄भारतीय नौसेना ने MRSAM मिसाइल का सफल परीक्षण किया
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भारतीय नौसेना के पोत ‘कोच्चि ’और ‘चेन्‍नई ’ ने पश्चिमी समुद्र तट पर यह परीक्षण किया गया. यह मिसाइल 70 किमी तक वार कर सकती है.


भारतीय नौसेना द्वारा 17 मई 2019 को मध्‍यम दूरी की जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल (MRSAM) का सफल परीक्षण किया गया है. रक्षा मंत्रालय द्वारा हाल ही में यह जानकारी सार्वजनिक की गई है. एमआरएसएएम के सफल परीक्षण से भारतीय नौसेना की युद्ध प्रतिरोधक क्षमता में महत्‍वपूर्ण बढ़ोतरी होगी.

भारतीय नौसेना के पोत ‘कोच्चि ’और ‘चेन्‍नई ’ ने पश्चिमी समुद्र तट पर यह परीक्षण किया गया. इस मिसाइल का परीक्षण भारतीय नौसेना, डीआरडीओ और इजरायल एयरोस्‍पेस इंडस्‍ट्रीज के द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है.

परीक्षण👇🇮🇳

•    भारतीय नौसेना द्वारा किये गये परीक्षण के दौरान दो वॉर शिप की मिसाइलों को एक शिप से ऑपरेट किया गया.
•    इन्हें अलग-अलग टारगेट पर साधा गया जिनकी रेंज भी अलग-अलग रखी गई थी.
•    परीक्षण में पाया गया कि यह मिसाइल लड़ाकू विमान को भी नष्ट कर सकती हैं तथा सटीक वार करने में सक्षम हैं.
•    वर्तमान में इन मिसाइलों की सुविधा केवल चीन, रूस, अमेरिका, ब्रिटेन और फ़्रांस के पास की है.


प्रमुख बिंदु👇🇮🇳

•    डीआरडीओ ने इज़रायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज के साथ मिलकर इस मिसाइल का विकास किया है. भारत डायनामिक्स लिमिटेड ने एमआरएसएएम का निर्माण किया है.
•    भारत डायनामिक्स लिमिटेड ने एमआरएसएएम के निर्माण एवं विकास में मुख्य भूमिका निभाई है.
•    भविष्य में इस मिसाइल को भारत के सभी समुद्री युद्धपोतों में इस्तेमाल किया जा सकता है.
•    मध्यम दूरी तक मार कर सकने वाली यह मिसाइलें 70 किलोमीटर की दूरी तक निशाना साध सकती हैं.

❄विश्व दूरसंचार और सूचना समाज दिवस-2019
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विश्व दूरसंचार और सूचना समाज दिवस के लिए वर्ष 2019 का विषय है - मानकीकरण की खाई को पाटना.


विश्‍व दूरसंचार और सूचना समाज दिवस अर्थात वर्ल्‍ड टेलीकम्‍युनिशेन एंड इन्‍फॉर्मेशन सोसाइटी डे प्रत्येक वर्ष 17 मई को मनाया जाता है. इसका उद्देश्य इंटरनेट और नई प्रौद्योगिकियों द्वारा समाज में आये सामाजिक परिवर्तनों से लोगों को परिचित कराना है.

वर्ष 2019 का विषय है - मानकीकरण की खाई को पाटना (Bridging the standardization gap)

इस दिन लोगों के मूलभूत मानव अधिकारों के प्रति लोगों का ध्यान केन्द्रित करना तथा समाज के बेहतर विकास के लिए प्रस्तुत की गई सूचना को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराना इसका उद्देश्य है. इसी के चलते वर्ष 1973 में मैलेगा-टोर्रीमोलिनोन्स में एक सम्मेलन में 17 मई को यह दिवस मनाये जाने की घोषणा की गई थी.


मानकीकरण की खाई को पाटना (Bridging the standardization gap)👇🇮🇳

•    मानक स्थापित करना, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के लिए संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी के रूप में इंटरनेशनल टेलीकम्यूनिकेशन यूनियन (आईटीयू) के मिशन का एक बुनियादी स्तंभ है.
•    आईटीयू मानक सभी सतत विकास लक्ष्यों के लिए आईसीटी में तेजी लाने में मदद करते हैं.
•    2019 का विषय आईटीयू सदस्यों और अन्य प्रमुख हितधारकों के लिए निम्न अवसरों पर ध्यान केंद्रित करने की अनुमति देगा:
-    ITU के मानक बनाने की प्रक्रिया में विकासशील देशों की भागीदारी,
-    राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मानकीकरण प्रक्रिया में स्थानीय विशेषज्ञों को सशक्त बनाना; तथा
-    विकासशील देशों में अंतर्राष्ट्रीय मानकों के कार्यान्वयन को बढ़ावा देना.

दूरसंचार क्या है?👇🇮🇳

एक एक संचार प्रणाली होती है जिसे किसी केबल, टेलीग्राफ या प्रसारण माध्यम द्वारा दूर बैठे व्यक्ति से संपर्क करने के लिए उपयोग किया जाता है. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी, उत्पादन और निर्यात दोनों के संदर्भ में भारतीय उद्योग के सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्र हैं. मौजूदा समय में इन्टरनेट और मोबाइल दूरसंचार के सबसे प्रमुख उपकरण हैं.


❄रक्षा मंत्रालय ने मिलिट्री नर्सिंग स्टाफ को एक्स-सर्विसमैन दर्जा देने हेतु मंजूरी दी
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एक्स-सर्विसमैन का दर्जा दिए जाने पर एमएनएस अधिकारियों को सेवानिवृत्ति के उपरांत दोबारा कहीं नौकरी हासिल करने में आसानी होगी.


रक्षा मंत्रालय द्वारा चीफ ऑफ स्टाफ कमिटी की मीटिंग में चर्चा उपरांत तथा सैद्धांतिक सहमति के बाद मिलिट्री नर्सिंग स्टाफ (एमएनएस) को भी एक्स-सर्विसमैन का दर्जा दिए जाने को मंजूरी दी गई. रक्षा मंत्रालय का मानना है कि इसमें तकनीकी तौर पर एमएनएस अधिकारी एक्स-सर्विसमैन की दी गई परिभाषा में नहीं आते हैं, इसलिए सरकारी दस्तावेजों में इस परिभाषा का संशोधन किया जायेगा.

लाभ👇🇮🇳

•    एक्स-सर्विसमैन का दर्जा दिए जाने पर एमएनएस अधिकारियों को सेवानिवृत्ति के उपरांत दोबारा कहीं नौकरी हासिल करने में आसानी होगी.
•    इससे राज्य सरकार द्वारा सेवानिवृत्त अधिकारियों के लिए मौजूद नौकरियां हासिल करने में इन अधिकारियों को सुविधा होगी.
•    इसके अतिरिक्त सेवानिवृत्त अधिकारियों के बच्चों को कॉलेज में दाखिले में भी सुविधा मिलेगी.
•    गौरतलब है कि एमएनएस अधिकारी पहले से ही Ex-servicemen Contributory Health Scheme (ईसीएचएस) सुविधा का लाभ हासिल कर पा रहे हैं.

मुख्य बिंदु👇🇮🇳

•    थल, जल और वायु सेना में अहम भूमिका निभाने वाली 'फ्लोरेंस नाइटिंगेल्स' अर्थात मिलिट्री नर्सिंग सर्विस (एमएनएस) की महिला अधिकारियों को जल्द ही दूसरे फौजियों की तरह एक्स सर्विसमैन का दर्जा प्राप्त होगा.
•    यह दर्जा प्राप्त होने पर यह महिला अधिकारी सर्विस के दौरान अपनी आधिकारिक गाड़ी में स्टार प्लेट लगा सकेंगी, जो उनके रैंक और स्टेटस को दर्शाता है.
•    महिला ऑफिसर्स लंबे वक्त से अपने सम्मान की लड़ाई लड़ रही हैं और सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर रक्षा मंत्रालय से जवाब मांगा है.


पृष्ठभूमि👇🇮🇳

•    एमएनएस अधिकारियों को न तो एक्स सर्विस मैन का स्टीकर दिया जाता है और न ही आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के ब्रिगेडियर और उससे ऊंचे रैंक के अधिकारियों की तरह आधिकारिक गाड़ी में स्टार प्लेट और फ्लैग लगाने की इजाजत है, जो उनके स्टेटस को दर्शाता है.
•    लड़ाकू सेना की एकमात्र 'मिलिट्री नर्सिंग सर्विस', जिसमें सभी महिलायें शामिल हैं,  लगभग 15 वर्षों से अपने सम्मान की लड़ाई लड़ रही हैं.
•    इन मामलों में लगभग 28 ऐसे मामले हैं जिन पर महिला ऑफिसर्स ने बराबरी के लिए आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल (एएफटी) में अपील की है.
•    महिला अधिकारियों ने इसके लिए आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल (एएफटी) में अपील की और 2010 में एएफटी ने उनके पक्ष में फैसला देते हुए कहा कि आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के कमिशंड ऑफिसर्स की तरह एमएनएस ऑफिसर्स को भी रैंक और इंटाइटलमेंट में बराबरी का हक मिलना चाहिए.

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