दीपावली (श्री लक्ष्मी-गणेश) की पूजा करने की विधि

                          

दिवाली की पूजा कैसे करे ?


     Diwali ki puja ki vidhi :- दीपावली, हिन्दुओ का पवित्र त्यौहार है जिस दिन भगवन गणेश और देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। जिसमे गणेश जी रिद्धि, सिद्धि और लक्ष्मी जी धन समृद्धि का वरदान देती है। कई घरो में लक्ष्मी गणेश के अतिरिक्त देवी सरस्वती का भी पूजन किया जाता है जो विद्या की देवी है। दीपावली की पूजा में किसी भी प्रकार की भूल चूक नहीं होनी चाहिए। प्रतिवर्ष कार्तिक मास की काली अमास्या के दिन दीपावली का त्यौहार मनाया जाता है।
इस दिन सबसे अधिक महत्व लक्ष्मी-गणेश की पूजा का होता है। हिन्दू धर्म में शुक्रवार को लक्ष्मी और बुधवार को गणेश जी के दिन के नाम से जाना जाता है इसलिये यदि किसी को इनमे से किसी भी देवी या देव की पूजा करनी होती है तो उन्ही के दिनों में करते है लेकिन दीपावली पर इनके पूजन का अलग ही महत्त्व होता है। इसलिए पूजा का विशेष मुहूर्त होता है। आज हम आपको दीपावली पर गणेश-लक्ष्मी के पूजन की विधि बताने जा रहे है जिसके अनुसार पूजा करके आप श्री लक्ष्मी-गणेश का आशीष प्राप्त कर सकते है।
दीपावली को दिवाली के नाम से भी जाना जाता है। प्रतिवर्ष कार्तिक महीने की काली अमावस्या के दिन दीपावली मनाई जाती है। इस दिन प्रभु श्री रामचंद्र अपना वनवास खत्म करके वापस अयोध्या लौटे थे जिनके स्वागत के लिए अयोध्या वासियो ने घी के दीपक जलाये और तब से इस दिन को दीपावली के नाम से जाना जाने लगा। श्री लक्ष्मी जी को धन दाता और विष्णुप्रिय भी कहा जाता है क्योकि वे विष्णु जी को सबसे अधिक प्रिय है। जबकि गणेश जी को विघ्नहर्ता और रिद्धि-सिद्धि दाता कहा जाता है।

श्री लक्ष्मी-गणेश के पूजन के लिए आवश्यक सामग्री :-

दीपावली के पूजन के लिए विशेष समग्र की आवश्यकता होती है जिनका पूजा में अपना-अपना महत्त्व है। पूजा में प्रयोग होने वाली सभी आवश्यक सामग्रियों की सूची नीचे दी गयी है। ये सभी आपके नज़दीकी पूजा स्टोर पर उपलब्ध होंगी।
  • पूजा करने के लिए श्री लक्ष्मी – गणेश और माता सरस्वती की प्रतिमा।
  • अक्षत (चावल के दाने), धुप, द्वीप, अगरबत्ती और कपूर।
  • रोली, कुमकुम, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, रुई और कलावा।
  • नारियल, शहद, दही, गंगाजल, गुड़, धनिया और दूध।
  • फल, फूल, जाऊ, दूर्वा, चन्दन, घृत, पंचामृत, मेवे, खील, और बताशे।
  • लाल वस्त्र, इत्र, चौकी, कलश, कमल गट्टे की माला, शंख, आसान, थाली।
  • भोग लगाने के लिए मिष्ठान।
  • देवी को अर्पित करने के लिए चांदी का सिक्का और 11 दीपक आदि।
ऊपर लिखी गयी वस्तुओ को एकत्रित करने के बाद पूजा स्थल पर बैठे और शुभ मुहूर्त प्रारंभ होने पर पूजा प्रारंभ कर दे।

दीपावली पूजन करने के विधि (Diwali ki puja ki vidhi) :-

सर्वप्रथम दीप स्थापना :
पूजा करने से पूर्व पूजा स्थल का पवित्र होना आवश्यक है इसलिए सबसे पहले पवित्रीकरण करे। इसके लिए पूजा के जल पात्र से थोड़ा सा जल अपने हाथ में ले और उन्हें मूर्तियों पर छिड़के और नीचे लिखे मन्त्र का उच्चारण करे।
ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा।
य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स: वाह्याभंतर: शुचि:।।
इसी मन्त्र और पानी को आप अपने आपको, पूजा की सामग्री को और अपने आसान पर छिड़ककर उन्हें पवित्र कर ले।
अब जिस स्थान पर आपने बैठने के लिए आसन बिछाया है उसे पवित्र कर ले और माँ पृथ्वी को प्रणाम करते समय नीचे लिखे मन्त्र का उच्चारण करे।
  • पृथ्विति मंत्रस्य मेरुपृष्ठः ग ऋषिः सुतलं छन्दः कूर्मोदेवता आसने विनियोगः॥
  • ॐ पृथ्वी त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता। त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्‌॥ पृथिव्यै नमः आधारशक्तये नमः
   
अब देवताओ का आचमन करे :

  • ॐ केशवाय नमः, ॐ नारायणाय नमः, ॐ माधवाय नमः

           हाथो को धो ले और ॐ हृषिकेशाय नमः मन्त्र बोले। 




आचमन करने के पश्चात् आंखे बंद करे ले और अपने मन को स्थिर करके तीन बार गहरी साँस लीजिये। अर्थात प्राणायाम कीजिये। पूजा के प्रारंभ में स्वस्तिवाचन किया जाता है जिसके लिए पुष्प, अक्षत और थोड़ा का जल लेकर स्वतिनः इंद्र वेद मंत्रो का उच्चाकरण करे और साथ ही परमपिता परमात्मा को प्रणाम करे। इसके बाद संकल्प लिया जाता है जो हर प्रकार की पूजा का अभिन्न अंग है।

Diwali ki puja ki vidhi संकल्प ले :

संकल्प लेने के लिए हाथ में अक्षत, पुष्प और जल ले लें। और साथ ही कुछ धन भी ले लीजिये। इन सभी वस्तुओ को हाथ में लेकर संकल्प ले और संकल्प मन्त्र का जाप करे। “मैं अमुक व्यक्ति अमुक स्थान व् समय पर अमुक देवी-देवता की पूजा करने का रहा हूं, जिससे मुझे शास्त्रोक्त फल प्राप्त हों”।
मूर्तियो का पूजन :
सबसे पहले गणेशजी और गौरी का पूजन करे। उनके बाद वरुण पूजा अर्थात कलश पूजन करना चाहिए। इसके लिए हाथ में थोड़ा-सा जल लीजिये और आवाहन व् पूजन मन्त्र का उच्चारण करे और पूजन समग्र चढ़ाइए। इसके बाद नवग्रहों का पूजन करे। इसके लिए हाथ में अक्षत और पुष्प लीजिये और नवग्रह स्त्रोत्र पढ़े।
देविओं के पूजन :
इसके पश्चात् भगवती षोडश मातृकाओं का पूजन किया जाता है। हाथ में गंध, अक्षत और पुष्प लीजिये और 16 माताओं को नमस्कार करके, पूजन सामग्री चढ़ाइए। 16 माताओं के पूजन के बाद रक्षा बंधन किया जाता है। इस विधि में गणपति पर मौली (कलावा) चढ़ाये और अपने हाथ में धागा बंधवाये। इसके बाद भगवन को तिलक लगाएं। इसके बाद श्री महालक्ष्मी जी की पूजा प्रारंभ कीजिये।
दीपक पूजन (Diwali ki puja ki vidhi):
दिवाली का अर्थ ही होता है दीपों की लड़ी। दीपावली के दिन अपनी परंपरा के अनुसार टिल के तेल के सात, ग्यारह, इक्कीस दीये प्रज्वलित किये जाते है। इन सभी को एक थाली में रखकर इनका पूजन किया जाता है और बाद में इन्हें घर की अलग-अलग दिशाओ में रखा जाता है।
पूजा के पश्चात् घर की महिलाएं अपने हाथ से सोने-चांदी के आभूषण इत्यादि सुहाग की सभी सामग्रियों को माँ लक्ष्मी को अर्पित करे। अगले दिन स्नान आदि के पश्चात् विधि-सिधं से पूजन के बाद आभूषण और सुहाग आदि की सामग्रियों को माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद मानकर स्वयं प्रयोग करे।
  • पूजन समाप्त होने के पश्चात् माँ लक्ष्मी से अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा याचना करे।
न मैं आह्वान करना जानता हूँ, न विसर्जन करना। पूजा-कर्म भी मैं नहीं जानता। हे परमेश्वरि! मुझे क्षमा करो॥ मन्त्र, क्रिया और भक्ति से रहित जो कुछ पूजा मैंने की है, हे देवि! वह मेरी पूजा सम्पूर्ण हो। यथा-सम्भव प्राप्त उपचार-वस्तुओं से मैंने जो यह पूजन किया है, उससे भगवती श्रीलक्ष्मी प्रसन्न हों॥
इसके बाद श्री गणेश और श्री लक्ष्मी जी की आरती गाएं।


दिवाली के दिन भूलकर भी इन चीजों को किसी को न दें









दिवाली के दिन भूलकर भी इन चीजों को किसी को न दें, दिवाली के दिन यह चीजें किसी को भी नहीं देनी चाहिए, दिवाली पर गलती से भी न दें किसी को यह उपहार, दिवाली के दिन इन चीजों को नहीं दें

दिवाली साल का सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार होता है हर कोई अपने घर में माँ लक्ष्मी के आगमन की तैयारी करता है। और पूरे भारतवर्ष में हर जगह इस त्यौहार की धूम देखने को मिलती है। इस दिन माँ लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है, ताकि वो हमेशा आपके घर में विराजमान रहे, ऐसे में आज हम आपको कुछ ऐसी चीजों के बारे में बताने जा रहें है। जो दिवाली के दिन आपको किसी को भी नहीं देनी चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से आपके घर में आई लक्ष्मी दूसरों के घर चली जाती है, या फिर दूसरों के लिए वो अच्छी नहीं होती है।

सोना चांदी

दिवाली के दिन सोना चांदी लेना बहुत शुभ माना जाता है, और हर कोई खरीदता भी है। लेकिन दिवाली के दिन किसी को भी सोना या चांदी गिफ्ट नहीं करना चाहिए क्योंकि यह बहुत अशुभ माना जाता है और इसके कारण आपके घर की लक्ष्मी कहीं और चली जाती है।

लक्ष्मी गणेश की मूर्ति

खुशियों के त्यौहार दिवाली के दिन हर कोई माँ लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा करता है, ऐसे में आपको किसी को भी लक्ष्मी या गणेश जी की मूर्ति को गिफ्ट नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से आपकी बरकत उनके घर चली जाती है, और लक्ष्मी का वास भी आपके घर में नहीं होता है।

तेल और लकड़ी

तेल भी दिवाली के दिन किसी को नहीं देना चाहिए, पुराणों के अनुसार यह काफी गलत और अशुभ माना जाता है। साथ ही आपको लकड़ी भी इस दिन किसी को नहीं देना चाहिए यह भी अच्छा नहीं माना जाता है।

सिल्क

सिल्क यदि आप इस दिन किसी को गिफ्ट करते हैं तो ऐसा करना सामने वाले व्यक्ति के लिए काफी नुकसानदायक हो सकता है ऐसे में आपको इसे किसी को भी नहीं देना चाहिए। और जितना हो सके, किसी से लेना भी चाहिए।

लोहा या स्टील

यदि आप दिवाली पर किसी को लोहे या स्टील से बनी चीज गिफ्ट करती हैं, तो ऐसा करने से उस व्यक्ति के घर से माँ लक्ष्मी हमेशा के लिए रूठ जाती हैं। और आपको कभी गलती से भी ऐसी कोई चीज दिवाली के दिन किसी को भी नहीं देनी चाहिए।

काले रंग का सामान

माँ लक्ष्मी दिवाली के दिन सभी के घर बरकत लेकर आती है, ऐसे में आपको किसी को भी काले रंग का सामान नहीं देना चाहिए, और न ही धनतेरस से लेकर दिवाली तक ऐसी कोई चीज अपने घर में लानी चाहिए।

नुकीली चीजें

शास्त्रों के अनुसार नुकीली चीजे नकारत्मकता की प्रतीक होती है, ऐसे में दिवाली के दिन यह चीजे आपको किसी को भी नहीं देनी चाहिए जैसे की चाकू, सुई आदि। यदि कोई आपसे मांगता भी है तो उसे मना कर देना चाहिए।

अपने काम से सम्बंधित चीजें

दिवाली के दिन आपको अपने काम से सम्बंधित चीजे भी किसी को नहीं देनी चाहिए जैसे की यदि आप पढ़ते हैं तो आपको पेन या कलम आदि किसी को नहीं देना चाहिए।
तो यह हैं कुछ चीजें जो आपको दिवाली के दिन किसी को भी नहीं देनी चाहिए ताकि आपके घर में हमेशा लक्ष्मी का वास हो और दूसरों का भी कोई नुकसान न हो और उन पर भी माँ लक्ष्मी की कृपा बनी रहे।




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